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ओंकार परिक्रमा परिचय.. भाग-1


श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है श्रद्धालु नर्मदा जल लेकर भगवान ओंकारेश्वर एवं मान्धाता पर्वत की परिक्रमा करते हैं. यह ७ किलोमीटर की परिक्रमा है परिक्रमा पथ में कई मंदिर एवं पुरातत्व महत्व के स्मारक आते हैं...

सिद्धनाथ मंदिर 

वास्तुकला की दृष्टि से यह काफी प्रभावशाली मंदिर है.इस मंदिर को ब्रिटिश लोर्ड कर्जन द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था.यह द्वीप के पठारी भाग में स्थित है इसे एक विशाल न्याध्रार से आधार दिया गया है जिसके चारों ओर विभिन्न मुद्राओं में ५० हाथियों की मूर्तियां गढ़ी गयी हैं. ये मूर्तियां ५ फुट ऊँची हैं एवं एवं श्रेष्ठ कला का नमूना हैं. इनमे से २ नागपुर के संग्रहालय में संरक्षित है एवं शेष आंशिक या अधिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. मंदिर का केंद्रीय हिस्से में ४ ओर से प्रवेश की व्यवस्था है एवं अद्वितिय सभा मंडप भी बने है हर सभामंडप में १४ फुट ऊंचाई के १८ पठार के खम्भे हैं जिनपर सुन्दर आकृतियाँ उकेरी गयी हैं. अपने मूल स्वरुप में यह अवश्य ही एक प्रभावशाली ५ शिखरों वाला भव्य मंदिर रहा होगा.
 

 
 
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हेल्प : प्रातः 8 से शाम 8 बजे



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ओम्कारेश्वर